भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण सीएनजी (CNG) कारों की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। कम रनिंग कॉस्ट और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण मध्यमवर्गीय परिवार सीएनजी गाड़ियों को पहली पसंद मानते हैं। हालांकि, पारंपरिक सीएनजी कारों की सबसे बड़ी समस्या उनकी डिग्गी (Boot Space) में जगह की भारी कमी रही है, क्योंकि एक बड़ा सिलेंडर पूरा बूट स्पेस घेर लेता था।

इस समस्या को दूर करने के लिए वाहन निर्माताओं ने ‘डुअल सिलेंडर सीएनजी’ (Twin-Cylinder Technology) तकनीक पेश की है। इस विस्तृत लेख में हम गहराई से तुलना करेंगे कि single cylinder vs dual cylinder cng cars (सिंगल सिलेंडर और डुअल सिलेंडर सीएनजी कारों) में क्या मुख्य अंतर हैं, बूट स्पेस, परफॉर्मेंस और सुरक्षा पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, इनके फायदे-नुकसान क्या हैं और नई कार खरीदते समय आपको किसे चुनना चाहिए।
इस नई तकनीक ने सीएनजी कारों की परिभाषा ही बदल दी है। आइए दोनों प्रणालियों की कार्यप्रणाली और अंतर को विस्तार से समझते हैं।
सिंगल सिलेंडर सीएनजी तकनीक क्या है?
पारंपरिक सीएनजी कारों में कार की डिग्गी के अंदर एक बड़ा 60-लीटर पानी क्षमता वाला सिंगल स्टील या कंपोजिट सिलेंडर स्थापित किया जाता है।
यह सिंगल टैंक आकार में काफी बड़ा और भारी होता है। इसे स्थापित करने के बाद कार की डिग्गी में लगभग शून्य जगह बचती है, जिससे परिवार के साथ लंबी यात्रा पर जाते समय बड़े सूटकेस या लगेज रखना असंभव हो जाता है। इसके अलावा, भारी सिलेंडर ट्रंक में होने के कारण कार का पिछला हिस्सा भारी हो जाता है और स्पेयर व्हील (स्टेपनी) तक पहुंचना भी काफी मुश्किल होता है।
डुअल सिलेंडर सीएनजी तकनीक कैसे काम करती है?
टाटा मोटर्स (iCNG) और ह्युंडई (Hy-CNG Duo) जैसी कंपनियों ने इस समस्या का एक व्यावहारिक समाधान निकाला है।
इस तकनीक में एक बड़े 60-लीटर सिलेंडर के बजाय, 30-30 लीटर क्षमता के दो छोटे सिलेंडरों का उपयोग किया जाता है। इन दोनों सिलेंडरों को कार के पिछले बूट फ्लोर (फर्श) के नीचे समानांतर रूप से स्थापित किया जाता है और उनके ऊपर एक मजबूत फ्लैट बोर्ड लगा दिया जाता है। इससे कार की डिग्गी में 150 से 230 लीटर तक का व्यावहारिक बूट स्पेस मिल जाता है, जिससे आप आसानी से लगेज रख सकते हैं।
Single Cylinder vs Dual Cylinder CNG Cars Comparison
दोनों सीएनजी प्रणालियों की मुख्य विशेषताओं की तुलना नीचे दी गई तालिका में की गई है:
| तुलना का मापदंड | सिंगल सिलेंडर सीएनजी कार | डुअल सिलेंडर सीएनजी कार |
|---|---|---|
| डिग्गी का स्पेस (Boot Space) | लगभग शून्य (सूटकेस नहीं रख सकते) | 150 से 230 लीटर तक व्यावहारिक बूट स्पेस |
| ईंधन क्षमता (CNG Capacity) | 60 लीटर (लगभग 8 से 9 किग्रा सीएनजी) | 60 लीटर (दो 30-30 लीटर सिलेंडर) |
| वजन संतुलन (Weight Balance) | पिछला हिस्सा भारी, बॉडी रोल का खतरा | बेहतर वजन संतुलन और कम सेंटर ऑफ ग्रेविटी |
| स्टेपनी व्हील (Spare Wheel) | ट्रंक में फंसा रहता है, निकालना कठिन | गाड़ी के नीचे (Underbody) सुलभ |
| डायरेक्ट सीएनजी स्टार्ट | पहले पेट्रोल में स्टार्ट करना अनिवार्य | सीधे सीएनजी मोड में स्टार्ट करने की सुविधा |
| कीमत में अंतर (Price) | ₹20,000 से ₹30,000 तक सस्ती | आधुनिक तकनीक के कारण थोड़ी अधिक कीमत |
डुअल सिलेंडर सीएनजी कार खरीदने के 4 सबसे बड़े फायदे
- 1. पूरा बूट स्पेस मिलना: इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको माइलेज के साथ-साथ बूट स्पेस से समझौता नहीं करना पड़ता। आप आसानी से दो-तीन बड़े सूटकेस रख सकते हैं।
- 2. बेहतर ड्राइविंग डायनेमिक्स: दो छोटे सिलेंडरों को नीचे स्थापित करने से गाड़ी का ‘सेंटर ऑफ ग्रेविटी’ कम रहता है। इससे तेज मोड़ पर गाड़ी का संतुलन बेहतर रहता है और बॉडी रोल कम होता है।
- 3. सुरक्षा और उन्नत माइक्रो स्विच: डुअल सिलेंडर कारों में उन्नत सुरक्षा तकनीक दी जाती है। जब ईंधन भरवाते समय फ्यूल लिड (ढक्कन) खुलता है, तो माइक्रो-स्विच अपने आप कार के इंजन को बंद कर देता है और गैस की आपूर्ति काट देता है।
- 4. डायरेक्ट सीएनजी मोड स्टार्ट: टाटा की डुअल सिलेंडर iCNG कारों को आप सुबह-सुबह सीधे सीएनजी मोड में स्टार्ट कर सकते हैं, इसके लिए पहले पेट्रोल पर इंजन गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती।
सिंगल सिलेंडर सीएनजी कारों के फायदे और सीमाएं
यद्यपि डुअल सिलेंडर तकनीक अधिक व्यावहारिक है, लेकिन मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां अभी भी कई मॉडल्स में सिंगल सिलेंडर तकनीक का उपयोग करती हैं।
- सस्ती शुरुआती कीमत: सिंगल सिलेंडर तकनीक वाली कारें खरीदने में थोड़ी सस्ती होती हैं।
- साधारण रखरखाव: इसमें केवल एक सिलेंडर और एक वाल्व असेंबली होती है, जिससे इसका रखरखाव काफी सरल और कम खर्चीला होता है।
- सीमाएं: लगेज रखने की जगह न होना और स्पेयर व्हील निकालने में होने वाली परेशानी इसकी सबसे बड़ी सीमाएं हैं।
Best Dual Cylinder CNG Cars in India
यदि आप बूट स्पेस वाली डुअल सिलेंडर सीएनजी कार तलाश रहे हैं, तो भारतीय बाजार में निम्नलिखित मॉडल्स सबसे लोकप्रिय हैं:
- टाटा मोटर्स: टाटा पंच iCNG, टाटा टियागो iCNG, टाटा अल्ट्रोज iCNG और टाटा टिगोर iCNG। (इनकी विस्तृत जानकारी के लिए आप Tata Motors की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं)।
- ह्युंडई इंडिया: ह्युंडई एक्सटर Hy-CNG Duo और ह्युंडई ग्रैंड आई10 नियोस Hy-CNG Duo।
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निष्कर्ष के तौर पर, single cylinder vs dual cylinder cng cars की तुलना से स्पष्ट है कि यदि आप पारिवारिक उपयोग और लंबी यात्राओं के लिए सीएनजी कार खरीदना चाहते हैं, तो डुअल सिलेंडर सीएनजी कार ही आज के समय का सबसे समझदारी भरा और भविष्य-अनुकूल विकल्प है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या डुअल सिलेंडर सीएनजी कार में गैस कम आती है?
उत्तर: नहीं, दोनों प्रणालियों में सीएनजी क्षमता (60 लीटर पानी क्षमता / लगभग 8 से 9 किग्रा गैस) बिल्कुल एक समान होती है।
Q2. क्या डुअल सिलेंडर सीएनजी कार का माइलेज कम होता है?
उत्तर: नहीं, माइलेज पूरी तरह से इंजन की दक्षता पर निर्भर करता है। सिलेंडर के दो हिस्सों में बंटने से माइलेज पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
Q3. क्या डुअल सिलेंडर कार का सीएनजी हाइड्रो-टेस्टिंग अलग से कराना पड़ता है?
उत्तर: हाँ, 3 साल बाद जब सीएनजी सिलेंडर की हाइड्रो-टेस्टिंग की समय-सीमा आती है, तो दोनों सिलेंडरों का परीक्षण अलग-अलग किया जाता है।
Q4. क्या पुरानी सिंगल सिलेंडर सीएनजी कार में डुअल सिलेंडर लगवाया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, आफ्टरमार्केट में डुअल सिलेंडर किट फिट कराना अभी कानूनी और सुरक्षा के लिहाज से मान्य नहीं है। यह केवल कंपनी-फिटेड आता है।
Q5. क्या डुअल सिलेंडर कार में स्टेपनी निकालना आसान है?
उत्तर: हाँ, अधिकांश डुअल सिलेंडर कारों में स्टेपनी को गाड़ी के पिछले बंपर के नीचे (अंडरबॉडी) लगाया जाता है, जिसे बाहर से आसानी से निकाला जा सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई सीएनजी कारों और तकनीकों की जानकारी निर्माताओं की आधिकारिक विनिर्देशों पर आधारित है। विभिन्न कारों की बूट क्षमता और ऑन-रोड कीमतों में अंतर हो सकता है। सटीक विवरण के लिए निकटतम डीलरशिप से संपर्क करें।









